अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और उसके संचालन की पूरी जिम्मेदारी 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के कंधों पर है. चंदे और चढ़ावे को लेकर अक्सर यह ट्रस्ट चर्चा में रहता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह काम कैसे करता है. इस वीडियो में हम आपको इस ट्रस्ट के अंदर की पूरी कहानी और कार्यप्रणाली समझा रहे हैं.
ट्रस्ट का स्ट्रक्चर:
ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य हैं. इनमें से 11 सदस्यों (VHP नेता, धर्माचार्य, लीगल एडवाइजर) के पास वोटिंग का अधिकार है. बाकी 4 सरकारी अधिकारी कानून व्यवस्था देखते हैं, लेकिन वोटिंग में हिस्सा नहीं लेते.
ट्रस्ट के 4 मुख्य कर्ता-धर्ता कौन हैं?
महंत नृत्य गोपाल दास (अध्यक्ष): सभी नीतिगत और धार्मिक फैसले लेते हैं.
चंपत राय (महासचिव): CEO की तरह प्रशासनिक और कानूनी कामकाज देखते हैं.
स्वामी गोविंददेव गिरी (कोषाध्यक्ष): मंदिर के बैंक खाते, चढ़ावे और खर्चों का पूरा हिसाब-किताब रखते हैं.
नृपेंद्र मिश्रा (चेयरमैन, निर्माण समिति): PMO के पूर्व प्रधान सचिव, जिनकी निगरानी में मंदिर का आर्किटेक्चर और निर्माण कार्य हुआ है.
राम मंदिर के पुजारियों और स्टाफ की सैलरी
मुख्य पुजारी का वेतन: ₹38,500 प्रति माह
सहायक पुजारियों का वेतन: ₹33,000 से ₹36,000
चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों की सैलरी: ₹20,000
इसके अलावा पुजारियों को रहने-खाने, मेडिकल लीव और वीकली ऑफ (Weekly Off) जैसी सुविधाएं भी ट्रस्ट की तरफ से दी जाती हैं.
चढ़ावे से लेकर मंदिर की व्यवस्था तक, यह ट्रस्ट कैसे हर काम को मैनेज करता है, इसकी पूरी डिटेल जानने के लिए वीडियो को पूरा देखें.
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